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SPARSH Portal : स्पर्श पोर्टल
Special Project for Assistance, Rehabilitation & Strengthening of Handicapped (SPARSH) - a caring touch for disabled, old and destitute persons
स्पर्श अभियान :रणनीति  
 
Strategy/रणनीति
A decision was taken by the Hon. Chief Minister to take up focussed action for the welfare and empowerment of the disabled persons with the highest priority. As per the advice of the Hon. CM, the department launched Project ‘SPARSH’ as the integrated welfare and empowerment project for the target population Objectives, challenges involved in the exercise and shortcomings and limitations of the manual system of management and monitoring of such a large and diversified initiative were analysed in detail. In view of multiple users, large number of controlling departments and huge array of stakeholders and schemes, one required a platform to facilitate interdepartmental collaboration, coordination, seamless integration of activities, and smooth automation of key processes and updation of key information in real-time. This seemed most easily possible through an online application-based, bi-lingual, database driven, dynamic web-portal that could facilitate information based online monitoring, analysis and dissemination of live information in real-time. It was decided that the system has to be seamlessly integrated with commonly available SMS technology so that communication with large number of target population, field level functionaries and other stakeholders is possible. It was also decided to exploit the core banking facilities for secure and timely transfer of funds to the beneficiaries and real-time monitoring of the fund utilization.
It was felt that it would not be possible to define the complete requirements & scope of the portal in one go. The needs and requirements would continue to evolve, grow and mature. Therefore, an in-house professional agency was needed to address the changing requirements, provide a continued handholding support and ensure its sustenance. Accordingly, SPARSH initiative was conceptualized & implemented through National Informatics Centre and the programs & activities with highest potential to improve the governance in were taken-up. All district offices, Janpad Panchayat offices and Nagar Nigams/ Nagar Palika and Nagar Panchayats had to be on board to ensure the effective implementation of the initiative. To ensure support of District Collectors and CEOS of Zilla Panchayats & ensure sustenance of the initiative, instructions from the Chief Secretary also issued.
Implementation Strategy :
  • Design and development of integrated system with the objective to facilitate a common platform and address diverse needs for all stakeholders, interdepartmental collaboration & coordination, information based online monitoring, analysis and dissemination of live information.
  • The system also aimed to provide a common and integrated platform for the effective implementation, monitoring and evaluation of the ‘SPARSH Project’
  • The portal facilitated the capturing of all the survey data and creation of the comprehensive database of the detailed profile of all registered persons their individual needs and requirements.
  • The application and has designed and developed by National Informatics Centre, Madhya Pradesh as an online, work flow, role and authority based suite of applications with roles for various stakeholders.
  • जिला नोडल अधिकारी, सहायक नोडल अधिकारी, स्पर्श दल एवं स्पर्श मित्र की नियुक्ति के पश्चात्‌ स्पर्श अभियान की रणनीति के तहत हितग्राहियों को चिन्हित किया जायेगा।
  • चिन्हित हितग्राहियों का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र/सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर किया जायेगा। आवश्यकतानुसार गहन स्वास्थ्य परीक्षण जिला चिकित्सालय में कराया जाये।
  • विक्षिप्त एवं मंदबुद्वि व्यक्तियों के लिए उच्च, एवं स्कूल शिक्षा, चिकित्सा महाविद्यालय एवं स्वास्थ्य विभाग के मनोचिकित्सक की सेवाएं प्राप्त की जायेंगी।
  • स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान हितग्राहियों के नहलाने, केस काटने, नये वस्त्र जिसमें पुरूषों के लिए कुर्ता पजामा एवं महिलाओं के लिए सलवार सूट एवं अन्य आवश्यक वस़्त्र स्वयं सेवकों के माध्यम से पहनाये जायेंगे। इस कार्य के लिए चिकित्सालय/पुलिस/जेल में उपलब्ध (बाल काटने, कपड़े पहनाने) स्टॉफ की सेवाएं ली जायेंगी। यदि यह उपलब्ध नहीं होती हैं तो बाजार से दैनिक मजदूरी पर ऐसे व्यक्तियों की सेवाएं ली जायेंगी जो इस कार्य को करने के लिए सहमत हो।
  • स्वास्थ्य परीक्षण के उपरान्त निराश्रित वृद्वों को वृद्वाश्रम में प्रवेश दिलाया जायेगा। मानसिक रूप से ग्रसित व्यक्ति को मानसिक चिकित्सालय में उपचार के लिए भेजा जायेगा, जिसके लिए एम्बूलेन्स की सुविधा रेडक्रास/रोगी कल्याण समिति के माध्यम से उपलब्ध कराई जायेगी। मंदबुद्वि से ग्रसित बालक/बालिकाओं के लिए स्कूलों/संस्थाओं में प्रवेश दिलाया जाये।
  • चिन्हित किये गये हितग्राहियों को एक कार्ड ''स्पर्श कार्ड'' के नाम से जारी होगा जिसमें हितग्राहियों का पूर्ण परिचय के साथ-साथ निःशक्तता का प्रमाण पत्र, बी.पी.एल. कार्ड, दीनदयाल अन्त्योदय उपचार कार्ड उपलब्ध कराया जायेगा और इस कार्ड में उन्हें क्या-क्या सुविधाएं प्रदत्त की जायेगी का उल्लेख किया जायेगा तथा स्पर्श मित्र का दायित्व रहेगा कि चिन्हित हितग्राही को अत्यावश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो जाएं।
  • इस अभियान की सफलता प्रचार-प्रसार पर निर्भर करेगी। इसलिए प्रचार-प्रसार से अनुकूल वातावरण का निर्माण कराया जाए। प्रचार-प्रसार ग्रामीण, शहरी क्षेत्रों एवं दूरदराज के ऐसे क्षेत्र जहां पर पहुंच कम होती है चाहे वह शहर हो या ग्राम वहां तक प्रचार-प्रसार किया जाए। प्रचार-प्रसार के लिए मुखय रूप से लाउडस्पीकर, ग्रामीण क्षेत्रों में डोंडी पीटवाकर, स्थानीय समाचार-पत्र एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से कराया जाए।
  • प्रचार-प्रसार एक सशक्त माध्यम नगरीय निकाय के महापौर, अध्यक्ष, पार्षद और ग्रामीण निकायों में सरपंच, पंच को पत्र लिखकर अनुरोध किया जाए तथा शासकीय भवन एवं स्कूलों के दिवालों पर लेखन कराया जाये। इसके अलावा ग्रामीण अंचलों में कार्य कर रहे आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, कोटवार, वनकर्मियों के माध्यम से कराया जाए।
  • स्वास्थ्य परीक्षण हेतु शिविर में ले जाने एवं मानसिक चिकित्सालय तक ले जाने के लिए न्यायालय से मेन्टल हेल्थ एक्ट 1987 के अन्तर्गत रिशेपशन अनुमति प्राप्त करना।
  • जिला स्तर पर कलेक्टर अभियान की देखरेख करेंगे, पुलिस अधीक्षक / पुलिस का भी सहयोग लिया जाये। मुखय कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत/ जिला नोडल अधिकारी एवं संयुक्त संचालक/उप संचालक, सहायक जिला नोडल अधिकारी होंगे। आयुक्त, नगर निगम और उनके द्वारा अधिकृत अपर आयुक्त/उपायुक्त ,मुखय नगरपालिका अधिकारी,नगर पालिका /नगर पंचायत/ अपने-अपने निकायों के लिए तथा मुखय कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत, विकासखण्ड के लिए नोडल अधिकारी होंगे।
  • प्रगणक स्पर्श अभियान की रणनीति के तहत हितग्राहियों को चिन्हित करेंगे।
  • विक्षिप्त एवं मंदबुद्वि व्यक्तियों के लिए उच्च, एवं स्कूल शिक्षा, चिकित्सा महाविद्यालय एवं स्वास्थ्य विभाग के मनोचिकित्सक की सेवाएं प्राप्त की जायेंगी।
  • चिन्हित किये गये हितग्राहियों को एक कार्ड ''स्पर्श कार्ड'' के नाम से जारी होगा जिसमें हितग्राहियों का पूर्ण परिचय के साथ-साथ निःशक्तता का प्रमाण पत्र, बी.पी.एल. कार्ड, दीनदयाल अन्त्योदय उपचार कार्ड उपलब्ध कराया जायेगा और इस कार्ड में उन्हें क्या-क्या सुविधाएं प्रदत्त की जायेगी का उल्लेख किया जायेगा । यह कार्ड मुखयालय से उपलब्ध कराया जायेगा।
  • इस अभियान की सफलता प्रचार-प्रसार पर निर्भर करेगी। इसलिए प्रचार-प्रसार से अनुकूल वातावरण का निर्माण कराया जाए। ग्रामीण अंचलों में कार्य कर रहे आशा, आंगनबाडी कार्यकर्ता, कोटवार आदि का भी सहयोग लिया जाये।
  • मानसिक चिकित्सालय तक ले जाने के लिए न्यायालय से मेन्टल हेल्थ एक्ट 1987 के अन्तर्गत रिशेप्शन अनुमति प्राप्त करना आवश्यक होगा।
  • स्पर्श स्थायी कार्ड जारी करने के लिए अधिकृत अधिकारी 40 प्रतिशत से अधिक निःशक्तता का मेडिकल प्रमाण-पत्र होने पर ग्रामीण क्षेत्र के लिए मुखय कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत एवं एस.डी.एम.के संयुक्त हस्ताक्षर शहरी क्षेत्र के लिए आयुक्त, नगर निगम/मुखय नगरपालिका अधिकारी तथा संयुक्त संचालक/उप संचालक के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी कर सकेंगे।